मैं  बहुत  खुश थी ,जब मुझे पता चला कि मेरी यूनिवर्सिटी मे  खादी  पहनना  होता है l पापा की पुरानी फोटोज़  मे पापा हमेशा खादी पहने होते थे l साथ मे  झोला भी बाज़ू  मे टंगा होता था l इसी  कल्पना  के साथ मैंने खादी  के ढेरो सूट सिलवाए l मुझे ख़ुशी थी और गर्व भी l Image

मेरी यूनिवर्सिटी गाँधी जी के विचारो पर आधारित है l सन  1935  मै जब यह स्थपित हुई,उस समय भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष चल रहा था ,किसी ने हिंसा का रास्ता अपनाया तो किसी ने अहिंसा का l  अंहिंसा मे  सविनय अवज्ञा आन्दोलन ,सत्याग्रह और स्वदेशी अपनाओ अदि शामिल  थे l और  खादी स्वदेशी अपनाओ की ही देन थी l  इसी सम्मान की आस मै खादी हमारे यूनिवर्सिटी  की  ड्रेस कोड थी l जो वंहा के मौसम के भी अनुकूल थी l पर यूनिवर्सिटी मै महोल अलग था l छात्राओं के लिए खादी पहनना एक बोझ की तरह था l प्रशासन चाहता था की छात्राए  खादी  पहने  ,पर छात्राए इससे सहमत नहीं थी l मै  खादी  पहनती थी क्योंकि मै इसमें सहज  महसूस करती थी l
खेर, खादी  को सम्मान देने के लिए इसे ड्रेस कोड बनाना , यूनिवर्सिटी का अपना मत था l
पर खादी शर्मिन्दा हुई ,जब उसने पाया कि  वह जबरन पहनाई  जा रही है , खादी  और भी  शर्मिन्दा हुई जब उसे न पहनने पर जुर्माना लगाया गया, खादी तब  और अधिक  शर्मिन्दा हुई जब जुर्माने से बचने के लिए छात्राओ ने खादी  की  तरह दिखने वाले कपड़ो  को  पहनना शुरू किया l
क्या इसी आदर की हक़दार है खादी ???
Khadi  is a Thread Of Freedom.  खादी अपनाने का मूल उद्दॆश्य  स्वावलंबन से था ,ताकि हम अपने लघु उद्योगों  को बढ़ावा दे सके ,और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सके l खादी मात्र एक धागा नहीं है यह वह धागा है जो हमें स्वावलंबी बनाने मै सार्थक रही है l
तो क्यों न खादी का  सम्मान कुछ इस तरह से  करे कि इसे  लोगो द्वारा  स्वतंत्रता से अपनाने दिया जाए , न कि  नियम  बना कर l