आज बड़े दिनों बाद जब,

मैंने मन के सेलाबो को केनवास पर

उतारने के लिए रंगों को समेटा,

तो उन रंगों को फीका सा पाया,

वे रंग असली नहीं थे l

मुझे रंग चाहिए जिनमे,

घास के तिनके पर दिखने वाली हरे रंग सी चटख हो,

अपनी माँ को देख बच्चे की आँखों मे आने वाली चमक हो,

रंग जिनमे नीले आसंमा सी व्यापकता, और,

हरे- नीले समुद्र की लहरों सी चंचलता हो,

वह रंग भी चाहिए,

जिसमे सूरज अपने नारंगी – पीली किरणों को और अधिक फैला दे,

और वो लाल रंग जो गोकुल गाय के मखमली आवरण सा आभास दे,

एक पारदर्शी रंग जिसमे पानी सी तरावट हो, वह भी चाहिये

और वह रंग भी चाहिए,

जो रात को चाँद सा उजला और दिन को और अधिक गहरा बना देता है,
फिर भी एक रंग की कमी है,

शायद यह वह रंग होगा, जो इन सब रंगों से मिलकर बनेगा,

और फिर सजीव हो उठेगी केनवास पर मेरी छोटी सी दुनिया,

मुझे अब रंग भरने के लिए नए रंग चाहिए,
और हर रंग असली  चाहिए  l