बोगनवेलिया

सुर्ख गुलाबी , कुछ पारदर्शी पंखुड़ी वाला फूल जिसे बचपन में कभी नहीं तोड़ा l बहुत ही सामान्य सा दिखता था कभी किसी के आंगन में खिले गुलाब की तरह आकर्षित नहीं किया तो टूटने से बचा रहा l ये फूल जिसे में अब देखते ही खुश हो जाती हूँ –बोगनवेलिया हैं l

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बोगनवेलिया से लदी डगाल…..

ये बोगनवेलिया कभी किसी होटल की शोभा बढ़ाते या किसी के घर से झांकते यंहा ( जयपुर) में बहुतायत में दिख रहे हैं l और में इन बहुतायत में दिखने वाले फूलो में खोज रही हूँ इन्हें हर रोज़ कभी ऑफिस के रास्ते तो कभी बाज़ार जाते हुए l कंही ये झाड़ियों में खिल रहे हैं तो कंही तपती चट्टान के बाजू से मुस्कुरा रहे हैं l कचरे के ढेर के पास भी हैं ,ये l और ऊँचे भरे पेड़ो का सहारा लिए , देखो अब कैसे आसमां छु रहे हैं l और जब आसमां से नज़रे नीचे उतारी तो बीच में ही ठिठक गयी , क्योंकि देखो तो, छत पर, तारों से कैसे झूल रहे हैं ये l जब जयपुर आई तब यह शहर काफी गर्म  था, रेतीले से रंग का दिख रहा था सब जब तक बोगनवेलिया के बेहतरीन रंग न देखे थे l

हाँ , अब ये सिर्फ गुलाबी रंग में नहीं बल्कि खामोश सफ़ेद , पुराने पड़ गए नारंगी और हल्के गुलाबी रंगों में भी दिख रहे हैं l हर सुबह निकल पड़ती हूँ में इनकी खोज में l इनके रंगों को लेने , इनकी कोमलता को महसूस करने, वो कोमलता जो काँटों में खिलने पर कायम हैं l

Q2

कैसे इतनी गर्मी में कायम हैं इनके इतने रंग और इनके रंगों की चटख? कैसे सूखे में भी हँस रहे हैं ये l ये अजूबा हैं जीवन का – जैसे इन्होने अपने आप को ढाला हैं, हमेशा खिलते रहने के लिए l

क्यों ये फूल कभी अकेला नहीं दिखता, शायद ये समझते हैं एकदूसरे के साथ होने का मतलब l हाँ पर मिला था एक फूल अकेला , पर गिरा हुआ था फर्श पर , बेशक किसी ने तोड़ा होगा या हवा की मार नहीं झेल पाया होगा l

ये बोगनवेलियाके रंग  समाये हुए हैं अपनी सादगी को l जैसा बाहर वैसा ही भीतर, एक सादगी भरा फूल l

Q1

कैसे इतनी गर्मी में कायम हैं इनके इतने रंग और इनके रंगों की चटख? कैसे सूखे में भी हँस रहे हैं ये l ये अजूबा हैं जीवन का – जैसे इन्होने अपने आप को ढाला हैं, हमेशा खिलते रहने के लिए l

क्यों ये फूल कभी अकेला नहीं दिखता, शायद ये समझते हैं एकदूसरे के साथ होने का मतलब l हाँ पर मिला था एक फूल अकेला , पर गिरा हुआ था फर्श पर , बेशक किसी ने तोड़ा होगा या हवा की मार नहीं झेल पाया होगा l

ये बोगनवेलियाके रंग  समाये हुए हैं अपनी सादगी को l जैसा बाहर वैसा ही भीतर, एक सादगी भरा फूल l

कैसे ये सादगी आँगनो को सजाती हैं? कैसे हर मिटटी को अपना बना लेती हैं ?ये बोगनवेलिया का फूल बेशक कोई साधारण फूल नहीं हैं , एक पूरी कहानी हैं  l जीवन में समरसता सादापन संघर्षो में सफलता का किस्सा गढ़ते  l जो मेरे आसपास चारो और कायम हैं l